
डिजिटल डेस्क ( नई दिल्ली ):-
संपादन :- अश्वनी चौहान
30 नवंबर 1986 को उज़्बेकिस्तान के ताशकंद में सर्जियो गोर का जन्म हुआ | सर्जियो गोर का परिवार साल 1999 में अमेरिका शिफ्ट हो गया था | उस समय सर्जियो गोर्शकोव 12 साल के थे , उनके पिता सोवियत मिलिट्री के लिये एयरक्राफ्ट डिज़ाइनर का काम करते थे, लॉस एंजेल्स से उनकी स्कूलिंग पूरी हुई उसके बाद जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन पूरी करी |
सर्जिओ गोर अमेरिका के भारत में अब तक के सबसे कम उम्र के राजदूत होंगे | अभी उनकी उम्र मात्र 39 साल है | उनके पास भारत में राजदूत होने के साथ – साथ ” स्पेशल एन्वॉय फॉर साउथ एंड सेंट्रल एशियाई अफेयर्स ” का अतिरिक्त भार भी होगा | हालाँकि भारत में अभी उनकी नियुक्ति होने में समय लगेगा ,उन्हें अपनी नियुक्ति से पहले अमेरिकन सीनेट से कन्फोर्मशन लेनी पड़ेगी , जिसकी वजह से उनकी नियुक्ति भारत में इस साल के अंत तक ही हो पाएगी |
भारत में सर्जियो गोर का चुनौतीपूर्ण समय
भारत और अमेरिका के रिश्ते इस समय काफी चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं और इस नाजुक समय में गोर को दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश में भेजना ट्रम्प के लिये किस तरह से काम करेगा ये तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन जब भारत के विदेश मंत्री से इस बारे में प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूछा गया तो उन्होंने सिर्फ ” I Have read about it ” कह कर आगे प्रश्न लेने से इंकार कर दिया |
आखिर सर्जिओ गोर ही क्यों ?
39 साल के सर्जिओ गोर को न तो व्यापार और प्रबंधन का कोई अनुभव है और न ही उन्हें दक्षिण एशिया और भारत का कोई विशेष अनुभव है | इन सब कमियों के बाबजूद ट्रम्प प्रशाशन द्वारा उन्हें भारत के राजदूत बनाना उनकी सिर्फ एक काबिलियत को दर्शाता है और वो है उनका ट्रम्प का सबसे भरोसेमंद लोगों में से एक होना |
ट्रम्प से उनकी नजदीकी इस हद तक है की अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेन्स से लेकर अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबीओ fbi निदेशक काश पटेल , और अमेरिका के वित् मंत्री स्कॉट बेसेंट तक सभी की नियुक्तियों से पहले उनकी पृष्टभूमि और उनकी पिछली सभी गतिविधियों की जांच सर्जिओ गोर ने ही की थी|
गोर की तरफ से ही हरी झंडी मिलने की बाद ही ट्रम्प ने इन सब लोगों को अपने प्रशाशन का हिस्सा बनाया | भारत और अमेरिकी संबंधों पर बारीकी से नजर रखने वाले लोगों का मानना है की गोर की नियुक्ति भारत के लिये चुनौती के साथ – साथ एक मौका भी हो सकता है जिससे भारत और अमेरिका के संबंध जो अभी कठिन दौर से गुजर रहे हैं उनको सुधारा जा सके |
भारत के पास यह एक मौका रहेगा की सर्जिओ गोर के जरिये ट्रम्प तक यह बात पहुंचाई जाये की भारत जेनेटिकली मॉडिफाइड क्रॉप्स को अपने देश में लाने के खिलाफ क्यों है, इसके अलावा भारत के पास एक मौका यह भी रहेगा की एक limit तक अमेरिका से डेरी प्रोडक्ट्स भारत में आयत किये जा सकें |
यह कोई छुपी हुई बात नहीं है की भारत में दूध और डेरी प्रोडक्ट्स की जितनी खपत होती है उतना प्रोडक्शन नहीं है और बाजार मैं समय समय पर मिलावटी डेरी प्रोडक्ट्स के खबरें आती रहती हैं जिससे नुक्सान तो आम जनता का ही होता है | इस मिलावट को खत्म करने के लिये और सिर्फ कुछ मिल्क लॉबी के लोगों के प्रॉफिट को बचाने के लिये देश का नुक्सान नहीं करना चाहिये |