
तियानजिन ( चीन ):-
सम्पादन :- अश्वनी चौहान
तैयार हो जाइये एक बड़े भू- राजनैतिक शो के लिये ! 31 अगस्त से 1 सितम्बर 2025 तक चीन के तियानजिन में होने वाला शंघाई सहयोग संघटन (SCO) शिखर सम्मेलन इतिहास का सबसे चर्चित सम्मेलन बनने जा रहा है | वजह ? दुनिया के तीन सबसे ताकतवर शख्शियतें – भारत के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी , रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन , और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग – एक मंच पर नजर आने वाले हैं !
क्यों है यह सम्मेलन ख़ास ?
. इतिहास रचने वाला जमावड़ा :- 2001 में sco संगठन बनने के बाद अब तक का ये सबसे बड़ा SCO सम्मेलन होगा | इस सम्मेलन में 20 से अधिक देशों के शीर्ष नेतृत्व शामिल होंगे |
. मोदी के चीन में वापसी :- प्रधानमंत्री मोदी 7 साल बाद चीन जा रहे हैं उनकी इस यात्रा से भारत और चीन दोनों देशों के रिश्तों में एक नया मोड़ आने के उम्मीद है | इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साल 2018 में चीन के वुहान में शी जिनपिंग से मिले थे|
. पुतिन का पावर मूव :- पश्चिमी देशों की पाबंदियों के बावजूद पुतिन की मौजूदगी रूस की ताकत और प्रभाव को दर्शाएगी | यूक्रेन युद्ध शुरू होने की बाद पश्चिमी देशों ख़ास कर अमेरिका और इंग्लैंड की ये पूरी कोशिश रही है की रूस को पूरी तरह से अलग थलग किया जा सके इससे पश्चिमी देशों का बाकी दुनिया पर अपना रुतवा कायम रहता|
लेकिन पश्चिम की धौंस में न तो भारत आया और न ही चीन , इस वजह से पश्चिमी देश इन दोनों देशों से बुरी तरह से चिढ़े हुए हैं और शंघाई में होने वाली मीटिंग इस वजह से और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है | हालाँकि इस सम्मेलन को सफल बनाने के लिये चीन को भी अपना दोहरा मापदंड पीछे छोड़ना पड़ेगा नहीं तो ये मौका भी एक औपचारिकता मात्र ही बन कर रह जाएगा |
इससे पहले भी इस साल हुए sco के मीटिंग्स में चीन ने अपना एजेंडा चलाने की कोशिश करी जब sco देशों के रक्षा मंत्रियों की मीटिंग खत्म होने पर जब डिक्लेरेशन की बात आई और आतंकबाद के मुद्दे पर तब पकिस्तान में हुए जाफर ट्रैन हाईजैकिंग का नाम तो उस में शामिल था लेकिन भारत के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र तक नहीं था | चीन की इस चालाकी को भारत ने पकड़ा और डिक्लेरेशन पर हस्ताक्षर करने से मन कर दिया |
. ग्लोबल साउथ की एकजुटता का संदेश :- अमेरिका और पश्चिमी देशों की दबदबे की बीच ग्लोबल साउथ जिसमें (लैटिन अमेरिका , अफ्रीका और विकासशील एशिया की देश शामिल हैं ) इन सब की एकजुटता का मजबूत संदेश भी शामिल होगा |
ग्लोबल साउथ एक भौगौलिक शब्द मात्र नहीं है बल्कि यह आर्थिक और राजनैतिक असमानता को दर्शाता है , यह माना जाता है की ग्लोबल नार्थ के देश ग्लोबल साउथ के देशों के मुकाबले आर्थिक और राजनैतिक तौर पर ज्यादा सम्पन हैं |
. सम्मेलन में क्या होगा बड़ा धमाका ?
. ग्रैंड वेलकम डिनर :- 31 अगस्त की रात को 20 देशों के शीर्ष नेतृत्व के लिये एक शानदार रात्रि भोज का आयोजन किया जाएगा, जो मीडिया कवरेज का बहुत बड़ा आकर्षण बनेगा| इस रात्रि भोज में किस देश के नेता को बैठने के लिये कहाँ जगह दी गई है इस पर भी सबकी नजरें होगी |
. तियानजिन डिक्लेरेशन :- इस सम्मेलन में सुरक्षा , डिजिटल इकॉनमी , ऊर्जा और व्यापार को लेकर भी बड़ी घोषणाओं की उम्मीद है | अमेरिका द्वारा अलग अलग देशों पर लगाए जा रहे टेर्रिफ टाइम में SCO देश किस तरह अपनी एक अलग राह चुनते हैं ये भी देखने वाला होगा |
. मोदी-पुतिन-शी की मिनी मीटिंग :- सबकी नजरें इस बात पर भी होंगी की क्या सीमा विवाद , ऊर्जा और आर्थिक सहयोग पर भी कोई सरप्राइज डील सामने आती है या नहीं |
. ऑप्टिक्स का खेल :- यह सम्मेलन सिर्फ नीतियों का ही नहीं बल्कि ताकतवर तस्वीरों और कूटनीतिक संदेहों का भी मंच होगा |
बोनस ड्रामा :-
सम्मेलन के बाद पुतिन बीजिंग में द्वितीय विश्व युद्ध परेड में भी शामिल होंगे जहाँ रूस और चीन की सैन्य साझेदारी का जबरदस्त प्रदर्शन होगा |
निष्कर्ष :-
तियानजिन SCO समिट सिर्फ एक कूटनीतिक नहीं बल्कि एक पावर शो है ,तीन दिग्गज नेताओं की मौजूदगी से दुनिया भर में एक साफ़ संकेत जाएगा – भविष्य का भू- राजनैतिक खेल अब एशिया की मुट्ठी में है |